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कविता- ‘गण’

सुभाष ढुङ्गेल   POSTED ON : Thursday, 27 July, 2017 (3:37:52 PM)

कविता- ‘गण’


      ‘गण’



गणबहाल होस् या कुनै गण !

गुणादी होस् या त्यो गुणगाउँ !!

गुणवत्ताको छैन त्यहाँ गणना !

गुणग्राहीहरु भइ रहेछन् गौण !!

गुणबोधक मै हूँ भन्दो छ दुर्गुण !

गुणवान् को नहुने भो गुणगान !!

गुणस्तरहीनहरु कै हुँदैछ गुणा !

गुणगम्भीर प्रश्न,बेहिसाब गणित !!

गणराज्य अगणित र गणपतिहरु !

गुणात्मक हुन्छ र अनि गणतन्त्र !!